घर में रखे 10 ग्राम गहनों पर कितना पैसा मिल जाएगा — यह सवाल ज़रूरत पड़ने पर सबसे पहले आता है, और इसका जवाब तीन चीज़ों से तय होता है: आज का सोने का भाव, गहनों की शुद्धता, और RBI की तय की हुई ऋण-मूल्य सीमा।
नीचे पूरा हिसाब 22 सितंबर 2026 के संदर्भ भाव पर है, जिसमें 24 कैरेट सोना ₹15,214 प्रति ग्राम था। भाव रोज़ बदलता है, इसलिए आज का अपडेटेड भाव आज सोने का भाव पेज पर देख लीजिए।
10 ग्राम सोने पर कितना लोन: सीधा हिसाब
पहले गहनों की धातु कीमत निकलती है, फिर उस पर LTV लगती है।
| शुद्धता | 10 ग्राम की धातु कीमत | 85% पर कर्ज़ | 80% पर | 75% पर |
|---|---|---|---|---|
| 24 कैरेट (999) | ₹1,52,140 | ₹1,29,319 | ₹1,21,712 | ₹1,14,105 |
| 22 कैरेट (916) | ₹1,39,360 | ₹1,18,456 | ₹1,11,488 | ₹1,04,520 |
| 18 कैरेट (750) | ₹1,14,105 | ₹96,989 | ₹91,284 | ₹85,579 |
ज़्यादातर भारतीय गहने 22 कैरेट के होते हैं, इसलिए व्यावहारिक जवाब यही है: 10 ग्राम पर लगभग ₹1.18 लाख तक।
ध्यान दीजिए कि सिक्कों और बिस्किट पर नियम अलग हैं — कई बैंक केवल अपने बेचे हुए सिक्कों पर, वह भी सीमित वज़न तक, कर्ज़ देते हैं। गहनों पर यह पाबंदी नहीं होती।
RBI की नई LTV सीमा: अब स्लैब में
2025 के स्वर्ण ऋण निर्देशों से पहले सबके लिए एक ही सीमा थी — 75%। अब उपभोग के लिए लिए गए कर्ज़ पर यह स्लैब में है:
- ₹2.5 लाख तक — गहनों के मूल्य का 85% तक
- ₹5 लाख तक — 80% तक
- ₹5 लाख से ऊपर — 75% तक
यानी छोटी रकम लेने वालों को अब पहले से ज़्यादा कर्ज़ मिल सकता है। 10 ग्राम पर मिलने वाली रकम ₹2.5 लाख से नीचे रहती है, इसलिए आमतौर पर 85% वाली सीमा लागू होती है।
दो बातें जो रकम घटा देती हैं:
- सिर्फ़ धातु गिनी जाती है। RBI के नियम के अनुसार मूल्यांकन में नग, पत्थर, मोती और मेकिंग चार्ज शामिल नहीं होते। जड़ाऊ हार का बिल भले ₹2 लाख का हो, कर्ज़ सिर्फ़ उसमें लगे सोने पर मिलेगा।
- शुद्धता असल में जाँची जाती है। कर्ज़ आपके गहनों की वास्तविक शुद्धता पर बनता है, न कि "22 कैरेट मान लेने" पर। KDM या हॉलमार्क रहित पुराने गहनों में शुद्धता कम निकल सकती है।
ब्याज दर: बैंक बनाम NBFC
हमारी दर तालिका (18 ऋणदाता) से आज की शुरुआती दरें:
| ऋणदाता | दर की सीमा |
|---|---|
| यूनियन बैंक | 8.65% – 9.90% |
| PNB | 8.75% – 9.25% |
| SBI | 8.75% – 9.60% |
| इंडियन बैंक | 8.80% – 9.50% |
| बैंक ऑफ़ बड़ौदा | 9.00% – 9.40% |
| केनरा बैंक | 9.00% – 9.25% |
| फेडरल बैंक | 8.99% – 13.00% |
| ICICI बैंक | 9.25% – 18.00% |
| HDFC बैंक | 9.30% – 17.90% |
| मणप्पुरम | 9.90% – 26.00% |
| मुथूट | 10.90% – 26.00% |
| IIFL | 11.00% – 27.00% |
पैटर्न साफ़ है: सरकारी बैंकों की दरें कम और दायरा संकरा है; NBFC की शुरुआती दर आकर्षक दिखती है पर ऊपरी सीमा बहुत ऊँची है।
NBFC की नीची दरें आम तौर पर उन्हीं योजनाओं में मिलती हैं जिनमें आप हर महीने ब्याज चुकाते रहते हैं। ब्याज जोड़ते जाने वाली योजनाओं में दर 24% या उससे ऊपर पहुँच जाती है। इसलिए दर पूछते समय यह ज़रूर पूछिए कि वह किस शर्त पर है।
EMI और ब्याज का हिसाब
₹1,18,456 के कर्ज़ पर हमारी गणना (घटती शेष राशि पर, शुल्क अलग):
| योजना | भुगतान | कुल ब्याज |
|---|---|---|
| 12 महीने की EMI, 9% | ₹10,359 प्रति माह | ₹5,854 |
| 24 महीने की EMI, 9.5% | ₹5,439 प्रति माह | ₹12,076 |
| केवल ब्याज, 9% | ₹888 प्रति माह | मूलधन अंत में एकमुश्त |
| केवल ब्याज, 24% (NBFC की ऊँची दर) | ₹2,369 प्रति माह | मूलधन अंत में एकमुश्त |
अंतिम पंक्ति पर ध्यान दीजिए — दर 9% से 24% होते ही मासिक बोझ लगभग तीन गुना हो जाता है। अपनी रकम पर हिसाब EMI कैलकुलेटर से लगा लीजिए।
फीस भी जोड़िए: बैंकों में प्रोसेसिंग फीस आम तौर पर 0.25% से 1% के बीच और मूल्यांकन शुल्क अलग होता है; कुछ बैंक अभियान के दौरान इसे माफ़ भी करते हैं।
गोल्ड लोन किन लोगों के लिए सबसे अच्छा है
- जिनका क्रेडिट स्कोर ख़राब है या है ही नहीं — गहने ज़मानत हैं, इसलिए स्कोर की शर्त प्रायः नहीं होती।
- जिनके पास आय का प्रमाण नहीं है — किसान, दुकानदार, दिहाड़ी काम करने वाले।
- जिन्हें कुछ महीनों के लिए पैसा चाहिए — फ़सल आने तक, बिल चुकाने तक, या शादी जैसे एकमुश्त ख़र्च के लिए।
- जिन्हें पर्सनल लोन महँगा पड़ रहा है — 9% बनाम 15–30% का फ़र्क़ बड़ा है।
दस्तावेज़ भी कम लगते हैं: पहचान पत्र, पते का प्रमाण और गहनों का सत्यापन। पैसा अक्सर उसी दिन मिल जाता है।
सावधानियाँ जो सबसे ज़्यादा ज़रूरी हैं
- गहने दाँव पर हैं। न चुकाने पर ऋणदाता नीलामी कर सकता है। नीलामी से पहले सूचना अनिवार्य है और अतिरिक्त रकम आपको लौटाई जाती है, पर गहने वापस नहीं आते।
- वज़न और शुद्धता की रसीद लीजिए। गिरवी रखते समय हर वस्तु का वज़न, शुद्धता और संख्या रसीद में दर्ज होनी चाहिए।
- पैकेट सील होते देखिए। गहने आपके सामने सील हों, और सील पर आपके हस्ताक्षर हों।
- ब्याज चुकाते रहिए। ब्याज जुड़ते जाने से बकाया LTV सीमा पार कर सकता है, और तब ऋणदाता अतिरिक्त सोना या भुगतान माँग सकता है।
- शर्त लिखित में लीजिए — दर, अवधि, फीस, ब्याज चुकाने की शर्त और नीलामी की प्रक्रिया।
- दिन के हिसाब से ब्याज लेने वाले ऐप से बचिए। कुछ ऐप "0.1% प्रतिदिन" जैसी दर दिखाते हैं, जो सालाना 36% से ऊपर बैठती है।
पैसे की ज़रूरत पूरी न हो तो
10 ग्राम पर ₹1.18 लाख से ज़्यादा चाहिए तो विकल्प ये हैं:
- और गहने जोड़िए — रकम सीधे वज़न के अनुपात में बढ़ती है।
- बैंक चुनिए, NBFC नहीं — लंबी अवधि में दर का फ़र्क़ हज़ारों का पड़ता है।
- FD या प्रॉपर्टी पर लोन देखिए, अगर उपलब्ध हो।
- पर्सनल लोन आख़िर में — बिना ज़मानत का कर्ज़ हमेशा महँगा पड़ता है।
गोल्ड लोन देने वाले सभी ऋणदाताओं की तुलना हमारे गोल्ड लोन पेज पर है।
गोल्ड लोन की योजनाएँ: कौन-सी आपके लिए सही है
एक ही ऋणदाता कई तरह की योजनाएँ चलाता है, और चुनाव सीधे आपकी जेब पर असर डालता है।
- नियमित EMI योजना। हर महीने मूलधन और ब्याज, दोनों की किस्त। कुल ब्याज सबसे कम पड़ता है और अवधि के अंत में गहने छूट जाते हैं। जिनकी मासिक आय नियमित है, उनके लिए यही सबसे सुरक्षित है।
- केवल ब्याज वाली योजना। हर महीने सिर्फ़ ब्याज, मूलधन अंत में एकमुश्त। मासिक बोझ कम रहता है — ₹1.18 लाख पर 9% की दर से लगभग ₹888 मासिक। पर अंत में पूरा मूलधन जुटाना पड़ता है, इसलिए यह तभी लें जब फ़सल, बोनस या कोई तय रकम आने वाली हो।
- बुलेट योजना। न मासिक ब्याज, न किस्त — सब कुछ अवधि के अंत में। सबसे सुविधाजनक दिखती है और सबसे महँगी पड़ती है, क्योंकि ब्याज जुड़ता जाता है। NBFC की ऊँची दरें अक्सर इन्हीं योजनाओं में लगती हैं।
- ओवरड्राफ़्ट योजना। बैंक सीमा तय कर देता है और आप जितना निकालते हैं, ब्याज उतने पर लगता है। जिनकी ज़रूरत बार-बार थोड़ी-थोड़ी रहती है, उनके लिए उपयोगी।
एक अहम बात जो लोग देर से समझते हैं: ब्याज जोड़ते जाने वाली योजनाओं में बकाया बढ़ता रहता है, और अगर वह गहनों के मूल्य की तय सीमा पार कर जाए तो ऋणदाता अतिरिक्त भुगतान या और सोना माँग सकता है। सोने का भाव गिरने पर यह जोखिम और बढ़ जाता है। इसलिए ब्याज हर महीने चुकाते रहना सबसे समझदारी भरा तरीक़ा है।
नवीनीकरण और गहने छुड़ाने की प्रक्रिया
अवधि पूरी होने पर तीन रास्ते होते हैं: पूरा भुगतान करके गहने छुड़ा लेना, बकाया चुकाकर लोन का नवीनीकरण कराना, या आंशिक भुगतान करके शेष पर नया कर्ज़ बनवाना। नवीनीकरण के समय गहनों का दोबारा मूल्यांकन होता है — भाव बढ़ा हो तो सीमा बढ़ जाती है, घटा हो तो घट जाती है।
गहने लेते समय ये बातें ज़रूर जाँचिए:
- सील आपके सामने खुले और रसीद में दर्ज वज़न से मिलान करें।
- हर वस्तु गिनकर लें — रसीद में जितनी वस्तुएँ लिखी थीं, उतनी ही वापस मिलनी चाहिए।
- "कोई बकाया नहीं" का प्रमाण-पत्र लीजिए, ताकि बाद में कोई विवाद न हो।
- रसीदें संभालकर रखिए कम से कम कुछ महीनों तक।
कितने ग्राम पर कितना मिलेगा: एक त्वरित तालिका
22 कैरेट गहनों पर, आज के भाव और 85% सीमा के हिसाब से (हमारी गणना):
| वज़न | धातु कीमत | अनुमानित कर्ज़ |
|---|---|---|
| 5 ग्राम | ₹69,680 | ₹59,228 |
| 10 ग्राम | ₹1,39,360 | ₹1,18,456 |
| 20 ग्राम | ₹2,78,720 | ₹2,22,976 (80% स्लैब) |
| 50 ग्राम | ₹6,96,800 | ₹5,22,600 (75% स्लैब) |
ध्यान दीजिए कि 20 ग्राम पर रकम ₹2.5 लाख पार कर जाती है, इसलिए वहाँ 80% वाली सीमा लगती है, और 50 ग्राम पर 75% वाली। यही कारण है कि प्रति ग्राम मिलने वाली रकम बड़े वज़न पर थोड़ी घट जाती है। इसलिए अगर ज़रूरत कम है तो पूरे गहने गिरवी रखने के बजाय उतना ही सोना दीजिए जितने से काम चल जाए — बाक़ी गहने आपके पास सुरक्षित रहेंगे, और कम रकम पर ऊँची LTV का फ़ायदा भी मिलेगा।
निष्कर्ष
आज के भाव पर 22 कैरेट के 10 ग्राम गहनों पर लगभग ₹1.18 लाख तक कर्ज़ मिल सकता है — बशर्ते गहने सादे हों और शुद्धता पूरी निकले। भाव रोज़ बदलता है, इसलिए आवेदन से पहले ताज़ा भाव और ऋणदाता की दर, दोनों जाँच लीजिए।
और सबसे ज़रूरी बात: गोल्ड लोन इसलिए सस्ता है क्योंकि जोखिम आपके गहनों पर है। उतना ही लीजिए जितना तय समय में लौटाया जा सके।