बिज़नेस लोन कितना मिल सकता है? छोटे कारोबार को बिना कुछ गिरवी रखे आमतौर पर ₹20 लाख तक। प्रधानमंत्री मुद्रा योजना की ऊपरी सीमा यही है, और RBI ने 1 अप्रैल 2026 से बैंकों के लिए माइक्रो और स्मॉल एंटरप्राइज़ (MSE) के ₹20 लाख तक के लोन पर कोलैटरल न लेना अनिवार्य कर दिया है। वर्किंग कैपिटल में बैंक अनुमानित सालाना टर्नओवर का कम से कम 20% देते हैं (₹5 करोड़ तक की लिमिट पर), और CGTMSE गारंटी के सहारे बिना गिरवी ₹10 करोड़ तक का लोन संभव है। बड़े बैंक और NBFC के अनसिक्योर्ड बिज़नेस लोन ₹75 लाख से ₹1 करोड़ तक जाते हैं, पर उनके लिए अक्सर ₹40 लाख का टर्नओवर और कम से कम 3 साल पुराना कारोबार चाहिए।
असल रकम तीन बातों से तय होती है: कौन-सी योजना या प्रोडक्ट, कारोबार कितना बड़ा और पुराना है, और ITR, GST रिटर्न व बैंक स्टेटमेंट में कमाई कितनी दिखती है। हर आँकड़ा 8 अक्टूबर 2026 को mudra.org.in, cgtmse.in, RBI और लेंडरों की अपनी वेबसाइटों से मिलाया गया है। बाक़ी तरह के लोन की सीमा कैसे बनती है, यह मुख्य लेख लोन कितना मिल सकता है में है।
बिज़नेस के लिए कितना लोन मिल सकता है: पाँच रास्ते, पाँच सीमाएँ
| रास्ता | किसके लिए | अधिकतम रकम | गिरवी (कोलैटरल) |
|---|---|---|---|
| मुद्रा लोन (PMMY) | गैर-कृषि आय वाली छोटी इकाइयाँ | ₹20 लाख (तरुण प्लस) | ₹20 लाख तक बैंक नहीं माँग सकते |
| PMEGP | 18+ उम्र, सिर्फ़ नया प्रोजेक्ट | प्रोजेक्ट लागत ₹50 लाख (मैन्युफैक्चरिंग), ₹20 लाख (सर्विस) | ₹20 लाख तक कोलैटरल-फ्री |
| स्टैंड-अप इंडिया | SC/ST और महिला उद्यमी, नया उद्यम | ₹10 लाख से ₹1 करोड़ | क्रेडिट गारंटी (CGFSIL) कवर |
| CGTMSE गारंटी वाला लोन | माइक्रो और स्मॉल एंटरप्राइज़ | ₹10 करोड़ (बैंक), ₹2 करोड़ (SFB/RRB/को-ऑप), ₹50 लाख (MFI) | नहीं |
| अनसिक्योर्ड बिज़नेस लोन | 3 साल से पुराना, मुनाफ़े वाला कारोबार | लेंडर के अनुसार ₹15 लाख से ₹1 करोड़ | नहीं |
ये सब ऊपरी सीमाएँ हैं, वादा नहीं। MUDRA के FAQ के अनुसार रकम काम की ज़रूरत से और चुकौती कारोबार के कैश फ़्लो से तय होती है।
मुद्रा लोन में कितना मिलता है: शिशु से तरुण प्लस तक
MUDRA की वेबसाइट पर अब चार श्रेणियाँ दर्ज हैं:
| श्रेणी | लोन की रकम | किसके काम की |
|---|---|---|
| शिशु | ₹50,000 तक | ठेला, छोटी दुकान, शुरुआती काम |
| किशोर | ₹50,000 से ₹5 लाख | चल रहा छोटा कारोबार, मशीन या स्टॉक |
| तरुण | ₹5 लाख से ₹10 लाख | बढ़ता हुआ कारोबार |
| तरुण प्लस | ₹10 लाख से ₹20 लाख | सिर्फ़ पिछला तरुण लोन पूरा चुकाने वाले |
जो बातें अक्सर ग़लत समझी जाती हैं:
- ₹20 लाख सबके लिए नहीं। आम सीमा ₹10 लाख है; ₹20 लाख उन्हीं के लिए जिन्होंने तरुण श्रेणी का पिछला लोन सफलतापूर्वक चुकाया है।
- MUDRA ख़ुद लोन नहीं देता। यह रीफ़ाइनेंस संस्था है; लोन बैंक, RRB, स्मॉल फ़ाइनेंस बैंक, MFI या NBFC देते हैं। ऑनलाइन आवेदन udyamimitra.in से भी होता है।
- ब्याज दर तय नहीं, सब्सिडी नहीं। दरें "deregulated" हैं, और PMMY लोन पर अपने-आप कोई सब्सिडी नहीं मिलती।
- PAN अनिवार्य नहीं, पर KYC पूरी करनी होगी; छोटे लोन में आमतौर पर ITR नहीं माँगा जाता। शिशु लोन पर पूरे कागज़ के बाद सामान्यतः 7 से 10 दिन में फ़ैसला होता है।
SBI के मुद्रा पेज (आख़िरी अपडेट 3 दिसंबर 2025) पर अब भी तीन श्रेणियाँ और ₹10 लाख की सीमा लिखी है। उसके अनुसार ₹50,000 तक कोई मार्जिन नहीं, उससे ऊपर 20% मार्जिन (आपका अपना पैसा) लगता है; शिशु-किशोर पर प्रोसेसिंग फीस शून्य और तरुण पर 0.50% + टैक्स है।
उदाहरण: ₹10 लाख के काम के लिए मुद्रा (तरुण)
दुकान के विस्तार पर ₹10 लाख लगने हैं और बैंक SBI जैसा 20% मार्जिन माँगता है:
| मद | रकम |
|---|---|
| कुल ज़रूरत | ₹10,00,000 |
| आपका हिस्सा (20% मार्जिन) | ₹2,00,000 |
| बैंक लोन | ₹8,00,000 |
| प्रोसेसिंग फीस (तरुण, 0.50%) | ₹4,000 + GST |
| EMI — 12% उदाहरण दर, 5 साल | ₹17,796 |
| 5 साल में कुल ब्याज | ₹2,67,733 |
12% सिर्फ़ उदाहरण दर है, किसी बैंक की पेशकश नहीं; यह प्रकाशित रेंज (जैसे HDFC Bank की 10.75%–22.50%) के भीतर रखी गई है। अपनी दर पर किस्त EMI कैलकुलेटर से जाँचें।
दर बढ़ सकती है: SBI मुद्रा लोन की दर EBLR (रेपो से जुड़ा बेंचमार्क) से जोड़ता है। रेपो रेट अब 5.50% है — 7 अक्टूबर 2026 की बैठक में इसमें 0.25 प्रतिशत अंक की बढ़ोतरी हुई और नीति का रुख़ "calibrated tightening" हो गया। ऐसे में रेपो से बंधी फ्लोटिंग दरें ऊपर जा सकती हैं। यहाँ की सभी दरें 8 अक्टूबर 2026 को जाँची गई हैं।
टर्नओवर से कितना लोन मिलेगा: वर्किंग कैपिटल का 20% नियम
स्टॉक और कच्चे माल के लिए बैंक कैश क्रेडिट या ओवरड्राफ़्ट देते हैं। RBI के FAQ में दर्ज नायक कमेटी की रिपोर्ट के अनुसार ₹5 करोड़ तक की क्रेडिट लिमिट वाली छोटी इकाइयों की वर्किंग कैपिटल लिमिट अनुमानित सालाना टर्नओवर के कम से कम 20% के आधार पर तय होती है।
| अनुमानित सालाना टर्नओवर | न्यूनतम वर्किंग कैपिटल लिमिट (20%) |
|---|---|
| ₹25 लाख | ₹5 लाख |
| ₹50 लाख | ₹10 लाख |
| ₹1 करोड़ | ₹20 लाख |
जो बिक्री GST रिटर्न और बैंक खाते में नहीं दिखती, बैंक उसे नहीं गिनता। RBI के MSME निर्देश यह भी कहते हैं:
- एक ही खिड़की से टर्म लोन और वर्किंग कैपिटल के लिए ₹1 करोड़ तक का कंपोज़िट लोन दिया जा सकता है।
- ₹25 लाख तक के लोन पर फ़ैसला 14 कामकाजी दिनों में होना चाहिए।
- हर MSME को उद्यम पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन कराना होता है; माइक्रो एंटरप्राइज़ का निवेश ₹2.5 करोड़ और टर्नओवर ₹10 करोड़ तक होता है।
बिना गारंटी के कितना: RBI का ₹20 लाख नियम
RBI के MSME मास्टर डायरेक्शन (9 फ़रवरी 2026 को संशोधित) के अनुसार बैंक MSE इकाइयों के ₹20 लाख तक के लोन पर कोलैटरल सिक्योरिटी नहीं ले सकते। यह 1 अप्रैल 2026 या उसके बाद मंज़ूर या रिन्यू हुए लोन पर लागू है; पहले यह सीमा ₹10 लाख थी। अच्छे रिकॉर्ड पर बैंक अपनी नीति से इसे ₹25 लाख तक बढ़ा सकते हैं; PMEGP इकाइयों के लिए भी ₹20 लाख तक यही सलाह है।
बैंक मुद्रा लोन पर गिरवी माँगे, तो MUDRA के FAQ के अनुसार उसी बैंक के रीजनल या हेड ऑफ़िस में शिकायत करें, या दूसरे बैंक से संपर्क करें।
CGTMSE: बिना गिरवी ₹10 करोड़ तक — पर गारंटी किसकी?
CGTMSE भारत सरकार के MSME मंत्रालय और SIDBI का ट्रस्ट है। यह पैसा नहीं देता; बैंक को भरोसा देता है कि बिना गिरवी दिया लोन डूबा तो नुकसान का बड़ा हिस्सा ट्रस्ट भरेगा। सदस्य बैंक या NBFC अपनी जाँच से लोन मंज़ूर करता है, और उसके बाद बैंक गारंटी के लिए आवेदन करता है।
- अधिकतम सीमा: बैंकों के लिए ₹10 करोड़ प्रति कर्ज़दार; स्मॉल फ़ाइनेंस बैंक, RRB और को-ऑपरेटिव बैंकों के लिए ₹200 लाख; माइक्रोफ़ाइनेंस संस्थानों के लिए ₹50 लाख।
- गारंटी कवर (बैंक के लिए): ₹5 लाख तक के माइक्रो लोन पर 85%; महिला उद्यमियों पर 90%; SC/ST और दिव्यांग उद्यमियों पर 85%; बाक़ी पर 75%। रिटेल और होलसेल ट्रेडिंग भी पात्र है।
- फीस: सालाना गारंटी फीस (AGF) ₹10 लाख तक 0.37% से लेकर ₹8–10 करोड़ पर 1.20% तक है। योजना-दस्तावेज़ कहता है कि बैंक यह फीस अपने विवेक से कर्ज़दार से वसूल सकता है।
उदाहरण: CGTMSE फीस आप पर कितनी पड़ सकती है
| लोन | स्लैब की स्टैंडर्ड दर | पहले साल की फीस |
|---|---|---|
| ₹8 लाख | 0.37% | ₹2,960 |
| ₹40 लाख | 0.55% | ₹22,000 |
पहले साल फीस गारंटी वाली रकम पर, बाद में बकाया पर लगती है। मंज़ूरी पत्र में देखें कि यह आपसे ली जा रही है या नहीं।
PMEGP: प्रोजेक्ट कितना बड़ा, सब्सिडी कितनी
PMEGP नया काम शुरू करने वालों के लिए है: बैंक लोन के साथ सरकार मार्जिन मनी सब्सिडी देती है। बैंक ऑफ़ महाराष्ट्र के PMEGP पेज के अनुसार:
| श्रेणी | आपका योगदान | सब्सिडी (शहरी) | सब्सिडी (ग्रामीण) |
|---|---|---|---|
| सामान्य | 10% | 15% | 25% |
| विशेष (SC, ST, OBC, अल्पसंख्यक, महिला, पूर्व सैनिक, दिव्यांग, NER, पहाड़ी व सीमा क्षेत्र आदि) | 5% | 25% | 35% |
- प्रोजेक्ट की अधिकतम लागत: मैन्युफैक्चरिंग ₹50 लाख, बिज़नेस/सर्विस ₹20 लाख; इससे ऊपर का हिस्सा बैंक बिना सब्सिडी दे सकता है। ज़मीन की क़ीमत प्रोजेक्ट लागत में नहीं गिनी जाती।
- दूसरा लोन (अपग्रेडेशन): मौजूदा PMEGP, REGP या मुद्रा इकाइयों के लिए मैन्युफैक्चरिंग में ₹1 करोड़ और सर्विस में ₹25 लाख तक, सब्सिडी 15% (NER व पहाड़ी राज्यों में 20%)।
- पात्रता: 18 साल से ऊपर, कोई आय सीमा नहीं; मैन्युफैक्चरिंग में ₹10 लाख और सर्विस में ₹5 लाख से बड़े प्रोजेक्ट के लिए आठवीं पास। एक परिवार (ख़ुद और जीवनसाथी) से एक ही व्यक्ति।
- सब्सिडी कैसे मिलती है: हिमाचल प्रदेश खादी बोर्ड के अनुसार मार्जिन मनी 3 साल TDR में रहती है — उस पर ब्याज नहीं मिलता और लोन की उतनी रकम पर ब्याज भी नहीं लगता। यूनिट शर्तों पर खरी उतरे तो 3 साल बाद यह लोन में समायोजित होती है।
मौजूदा स्थिति पर साफ़ बात: बैंक ऑफ़ महाराष्ट्र के पेज पर योजना की मंज़ूरी वित्त वर्ष 2021-22 से 2025-26 तक लिखी है। आगे की मंज़ूरी हमें किसी पढ़े जा सकने वाले आधिकारिक पेज पर नहीं मिली, और PMEGP पोर्टल (kviconline.gov.in) जाँच के समय खुला नहीं। आवेदन से पहले KVIC या ज़िला उद्योग केंद्र से पूछ लें कि नए आवेदन और सब्सिडी जारी हो रहे हैं या नहीं।
उदाहरण: गाँव में ₹25 लाख की मैन्युफैक्चरिंग यूनिट
| मद | सामान्य श्रेणी | विशेष श्रेणी |
|---|---|---|
| आपका योगदान | ₹2,50,000 (10%) | ₹1,25,000 (5%) |
| बैंक लोन | ₹22,50,000 (90%) | ₹23,75,000 (95%) |
| मार्जिन मनी सब्सिडी | ₹6,25,000 (25%) | ₹8,75,000 (35%) |
शर्तें पूरी होने पर सब्सिडी 3 साल बाद लोन में समायोजित होती है — असली देनदारी सामान्य श्रेणी में लगभग ₹16.25 लाख और विशेष श्रेणी में लगभग ₹15 लाख बचती है।
स्टैंड-अप इंडिया: SC/ST और महिलाओं के लिए ₹10 लाख–₹1 करोड़
standupmitra.in के अनुसार यह योजना हर बैंक शाखा से कम से कम एक SC/ST और एक महिला उद्यमी को नया (ग्रीनफ़ील्ड) उद्यम लगाने के लिए ₹10 लाख से ₹1 करोड़ का कंपोज़िट लोन (टर्म लोन + वर्किंग कैपिटल) दिलाती है। प्रमोटर का योगदान 15% है — ₹50 लाख के प्रोजेक्ट में ₹7.5 लाख। बैंक ऑफ़ महाराष्ट्र का पेज 25% मार्जिन (दूसरी योजनाओं से मिलाकर) लिखता है, इसलिए शर्त बैंक से पक्की करें।
बिना योजना के: बैंक और NBFC के अनसिक्योर्ड बिज़नेस लोन
तीन साल से पुराने, मुनाफ़े वाले कारोबार के लिए बिना गिरवी टर्म लोन की प्रकाशित सीमाएँ:
| लेंडर | रकम | ब्याज दर | प्रोसेसिंग फीस | मुख्य शर्त |
|---|---|---|---|---|
| HDFC Bank | ₹75 लाख तक (चुनिंदा शहरों में ₹1 करोड़) | 10.75%–22.50% | 2% तक | टर्नओवर ₹40 लाख+, मौजूदा कारोबार 3 साल, 2 साल मुनाफ़ा |
| Kotak Mahindra Bank | ₹3 लाख–₹1 करोड़ | प्रकाशित नहीं | अधिकतम 2% + GST | टर्नओवर ₹40 लाख+, 3 साल कारोबार, 1 साल मुनाफ़ा |
| Tata Capital | ₹1 लाख–₹90 लाख (बैनर पर ₹1 करोड़*) | 12% से शुरू | प्रकाशित नहीं | — |
| Bajaj Finance | ₹2 लाख–₹80 लाख | 14%–23.50% | 4.72% तक (टैक्स सहित) | CIBIL 650+ |
| FlexiLoans | ₹50,000–₹50 लाख | 12%–28% | 2%–3% | CIBIL 650 |
| BharatPe क्रेडिट लाइन | ₹15 लाख तक | 18%–70% | पार्टनर लेंडर के अनुसार | — |
Axis Bank के पेज पर एक जगह बिना गिरवी ₹75 लाख और दूसरी जगह ₹2 करोड़ लिखा है — बैंक से लिखित में पूछें। HDFC Bank उद्यम रजिस्ट्रेशन सर्टिफ़िकेट देने वाले MSE से ₹5 लाख तक के लोन पर प्रोसेसिंग फीस नहीं लेता।
कोई लेंडर "टर्नओवर का इतना प्रतिशत" जैसा फ़ॉर्मूला नहीं छापता। ITR की आय, GST रिटर्न, बैंक स्टेटमेंट और चालू EMI देखकर वे तय करते हैं कि आप कितनी किस्त भर सकते हैं, और रकम उसी से निकलती है। लेंडरों की तुलना हमारे बिज़नेस लोन पेज पर है; बैंकों की सीमाएँ बैंक से कितना लोन मिल सकता है में और NBFC विकल्प बजाज फाइनेंस से कितना लोन मिल सकता है में देखें।
उदाहरण: ₹10 लाख, 4 साल — सबसे कम बनाम सबसे ऊँची दर
HDFC Bank की प्रकाशित रेंज के दोनों छोर पर हमारी गणना (HDFC की अवधि 12 से 48 महीने है):
| ब्याज दर | मासिक EMI | कुल ब्याज |
|---|---|---|
| 10.75% | ₹25,724 | ₹2,34,766 |
| 22.50% | ₹31,778 | ₹5,25,351 |
एक ही ₹10 लाख पर दर का फ़र्क़ चार साल में लगभग ₹2.91 लाख का है। ऊपर से 2% प्रोसेसिंग फीस ₹20,000 + ₹3,600 GST बनती है।
सिक्योर्ड लोन कब समझदारी है
₹20 लाख से ऊपर, CGTMSE कवर न हो तो बैंक प्रॉपर्टी, मशीनरी या FD गिरवी माँग सकता है। इससे रकम बड़ी और दर कम मिलती है, पर चूक पर संपत्ति दाँव पर होती है। दुकान या घर पर कितना लोन बनता है, यह घर पर कितना लोन मिल सकता है में है।
कौन-से दस्तावेज़ लगेंगे
- पहचान और पता: आधार, PAN (मुद्रा में अनिवार्य नहीं, पर KYC ज़रूरी), वोटर ID या पासपोर्ट।
- कारोबार का सबूत: उद्यम रजिस्ट्रेशन, ट्रेड लाइसेंस या GST रजिस्ट्रेशन।
- आय का सबूत (बड़े लोन में): HDFC Bank के अनुसार 6 महीने का बैंक स्टेटमेंट, 2 साल की ITR, 6 महीने के GST रिटर्न, और CA से प्रमाणित बैलेंस शीट व प्रॉफ़िट-लॉस खाता।
- आवेदन फ़ॉर्म: मुद्रा शिशु का एक पेज का और बाक़ी श्रेणियों का तीन पेज का फ़ॉर्म MUDRA की वेबसाइट पर है।
लिमिट बढ़ाने के व्यावहारिक तरीक़े
- उद्यम रजिस्ट्रेशन कराइए — MSME का दर्जा, कोलैटरल-फ्री नियम और CGTMSE कवर इसी से जुड़े हैं।
- पूरी बिक्री कागज़ पर लाइए। GST रिटर्न समय पर भरिए और बिक्री की रकम चालू खाते में आने दीजिए।
- मुद्रा की सीढ़ी चढ़िए। तरुण लोन समय पर चुकाने से ही तरुण प्लस खुलता है।
- CIBIL स्कोर सँभालिए। Bajaj Finance और FlexiLoans 650+ स्कोर माँगते हैं। स्कोर कैसे देखें, यह PAN कार्ड वाले लेख में है; कम स्कोर पर विकल्प कम CIBIL पर बिज़नेस लोन पेज पर।
- पुरानी EMI घटाइए और ₹20 लाख से ऊपर गिरवी न हो तो बैंक से CGTMSE कवर माँगिए।
आम ग़लतफ़हमियाँ और ठगी से बचाव
- "मुद्रा एजेंट" नाम की कोई चीज़ नहीं। MUDRA लिखता है कि उसने लोन दिलाने के लिए कोई एजेंट या बिचौलिया नहीं रखा, और ऐसे लोगों से दूर रहने की सलाह देता है।
- "गारंटीड मंज़ूरी" झूठ है। कोलैटरल-फ्री का मतलब बिना जाँच नहीं।
- लोन से पहले "फ़ाइल चार्ज" न भेजें। असली लेंडर फीस आधिकारिक माध्यम से लेते हैं या मंज़ूर रकम से काटते हैं (FlexiLoans भी डिस्बर्सल के समय काटता है)। निजी UPI पर पैसे माँगना ठगी का पक्का संकेत है।
- "PMEGP में 35% माफ़" हर किसी के लिए नहीं — सिर्फ़ विशेष श्रेणी के ग्रामीण प्रोजेक्ट पर, तय सीमा तक, 3 साल बाद शर्तें पूरी होने पर।
- ठगी हो जाए तो राष्ट्रीय साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 या cybercrime.gov.in पर शिकायत करें।
निष्कर्ष
छोटे कारोबार का पहला रास्ता लगभग हमेशा मुद्रा है: बिना गिरवी ₹10 लाख तक, और समय पर चुकाने पर ₹20 लाख तक। नया प्रोजेक्ट हो तो PMEGP या स्टैंड-अप इंडिया; वर्किंग कैपिटल के लिए टर्नओवर का 20%; और बड़ी रकम बिना गिरवी के लिए CGTMSE कवर। अनसिक्योर्ड NBFC लोन जल्दी मिलते हैं, पर दर का फ़र्क़ लाखों का पड़ सकता है। आवेदन से पहले बिज़नेस लोन एलिजिबिलिटी पेज पर अंदाज़ा लगाइए और मंज़ूरी पत्र में दर व फीस पढ़िए।