लोन कितना मिल सकता है, इसका छोटा जवाब यह है: बिना गिरवी वाले पर्सनल लोन में बैंक आम तौर पर आपकी मासिक सैलरी का 20 से 30 गुना तक देते हैं (Indian Bank 20 गुना, PNB 24 गुना, SBI 30 गुना), और गिरवी वाले लोन में संपत्ति की कीमत का एक तय हिस्सा — होम लोन में 75% से 90%, गोल्ड लोन में 75% से 85%, SBI के प्रॉपर्टी लोन में 60% से 65% और LIC पॉलिसी पर सरेंडर वैल्यू का 90% तक (कई नए प्लान में इससे कम)। हर लोन में आख़िरी रोक एक ही है: आपकी सारी किस्तें मिलाकर आय के तय प्रतिशत से ऊपर नहीं जा सकतीं।
यह पेज एक नक्शे की तरह काम करता है। हर लोन का नियम यहाँ छोटे में है, और साथ में उस विषय की विस्तृत गाइड का लिंक। हर आँकड़ा 8 अक्टूबर 2026 को सीधे बैंक, RBI, LIC या सरकारी पोर्टल के पेज पर जाँचा गया है।
लेंडर किन चार बातों से तय करते हैं कि कितना लोन मिल सकता है?
बैंक हो या NBFC, रकम तय करने से पहले हर लेंडर चार सवालों के जवाब देखता है। इनमें से जो जवाब सबसे छोटी रकम देता है, वही आपकी असली सीमा बनता है।
1. आय: आपकी तनख़्वाह कितनी किस्त उठा सकती है
लेंडर गिनता है कि नई और पुरानी सारी किस्तें आपकी आय का कितना हिस्सा ले लेंगी। इसे FOIR या EMI/NMI अनुपात कहा जाता है। कुछ बैंकों ने यह सीमा अपनी वेबसाइट पर खुलकर लिखी है:
- SBI पर्सनल लोन: EMI शुद्ध मासिक आय (NMI) के 65% तक।
- SBI होम लोन: आय जितनी ऊँची, अनुमत हिस्सा उतना बड़ा — 20% से लेकर 70% तक।
- SBI प्रॉपर्टी लोन: 50% (सालाना आय ₹5 लाख तक), 55% (₹10 लाख तक), 60% (उससे ज़्यादा)।
- Indian Bank पर्सनल लोन: नई किस्त जुड़ने के बाद टेक-होम सैलरी ग्रॉस के 40% से नीचे नहीं जानी चाहिए।
प्रतिशत को रुपयों में बदलने का पूरा तरीका, अलग-अलग अवधि और दरों पर, EMI के प्रतिशत से रकम निकालने वाली गाइड में तालिकाओं के साथ समझाया गया है।
2. क्रेडिट रिकॉर्ड: CIBIL स्कोर
RBI के निर्देश के मुताबिक़ सभी क्रेडिट ब्यूरो स्कोर 300 से 900 के एक ही पैमाने पर देते हैं, और लेंडर महीने में दो बार (15 तारीख़ और महीने के अंत की स्थिति के साथ) आपका डेटा ब्यूरो को भेजते हैं। स्कोर दो तरह से रकम बदलता है: कमज़ोर रिकॉर्ड पर आवेदन ठुकराया जा सकता है, और मंज़ूर हो तो दर ऊँची लगती है, जिससे उसी EMI में कम रकम बनती है।
कुछ योजनाओं में शर्त सीधी लिखी है — PNB का स्वरोज़गार पेशेवरों वाला पर्सनल लोन 750 या उससे ऊपर के स्कोर पर ही है। हर व्यक्ति साल में एक बार हर ब्यूरो से अपनी पूरी रिपोर्ट, स्कोर समेत, मुफ़्त ले सकता है।
3. गिरवी: संपत्ति की कीमत का कितना हिस्सा (LTV)
गिरवी वाले लोन में लेंडर संपत्ति की पूरी कीमत नहीं देता; बचा हिस्सा आपको अपनी जेब से लगाना होता है। लोन और संपत्ति की कीमत के इस अनुपात को LTV (लोन-टू-वैल्यू) कहते हैं। होम लोन और गोल्ड लोन में यह सीमा RBI तय करता है, जबकि प्रॉपर्टी और LIC पॉलिसी पर लोन में लेंडर की अपनी नीति चलती है।
4. उम्र और अवधि
अवधि जितनी लंबी, EMI उतनी छोटी — और इसलिए उसी आय पर रकम बड़ी। पर अवधि उम्र से बँधी रहती है। SBI होम लोन की अवधि 30 साल तक जा सकती है, पर आख़िरी किस्त 70 की उम्र से पहले भरनी होती है; प्रॉपर्टी लोन भी तब तक चुक जाना चाहिए जब तक सबसे उम्रदराज़ आवेदक 70 का न हो। पर्सनल लोन में SBI और HDFC बैंक 60 वर्ष तक के वेतनभोगियों को देखते हैं, जबकि ICICI बैंक की सीमा 58 वर्ष है।
किस लोन में कितना मिल सकता है: एक तालिका में
| लोन का प्रकार | रकम तय करने का मुख्य नियम | आधिकारिक उदाहरण | विस्तृत गाइड |
|---|---|---|---|
| पर्सनल लोन | सैलरी का गुना + EMI सीमा + CIBIL | SBI: 30 गुना NMI या EMI/NMI 65%, जो कम हो; अधिकतम ₹50 लाख | सैलरी-वार पर्सनल लोन गाइड |
| होम लोन | RBI की LTV सीमा + आय + उम्र | लोन ≤ ₹30 लाख: 90%; ≤ ₹75 लाख: 80%; इससे बड़ा: 75% | होम लोन की पात्रता गाइड |
| घर/प्रॉपर्टी पर लोन (LAP) | संपत्ति मूल्य का प्रतिशत + आय | SBI: 65% (लोन ₹1 करोड़ तक), 60% (₹7.5 करोड़ तक) | मकान गिरवी रखकर लोन (LAP) |
| कार लोन | ऑन-रोड कीमत का प्रतिशत + आय का गुना | SBI: ऑन-रोड कीमत का 100% तक; Bank of Baroda: 90% तक | कार लोन की सीमा पर गाइड |
| गोल्ड लोन | सोने की कीमत पर RBI की LTV | कुल लोन ₹2.5 लाख तक 85%; ₹2.5–5 लाख 80%; उससे ऊपर 75% | 10 ग्राम सोने का हिसाब |
| बिज़नेस लोन | योजना की सीमा + टर्नओवर/मुनाफ़ा | मुद्रा: ₹20 लाख तक; CGTMSE गारंटी कवर ₹10 करोड़ तक | मुद्रा, CGTMSE और टर्नओवर वाली गाइड |
| LIC पॉलिसी पर लोन | सरेंडर वैल्यू का प्रतिशत | आम नियम 90% तक (पेड-अप पर 85%); नए प्लान में 50%–80% | पॉलिसी लोन की पूरी शर्तें |
| क्रेडिट कार्ड पर लोन | कार्ड की लिमिट + भुगतान रिकॉर्ड | HDFC बैंक: इंस्टा लोन लिमिट के भीतर, जंबो लोन लिमिट के ऊपर | कार्ड पर लोन और कैश एडवांस |
तालिका में लिखी रकम ऊपरी सीमा है, वादा नहीं। मंज़ूरी के समय ऊपर के चार नियमों में से जो सबसे सख़्त बैठता है, वही आपकी रकम तय करता है।
कार लोन में SBI ने एक और गुणक लिखा है: केंद्रीय PSU के नियमित कर्मचारियों और रक्षा/अर्धसैनिक सैलरी पैकेज वालों के लिए अधिकतम रकम शुद्ध मासिक आय का 48 गुना है, और स्वरोज़गार लोगों के लिए ITR में दिखे शुद्ध मुनाफ़े या सकल कर-योग्य आय का 4 गुना। क्रेडिट कार्ड वाले लोन का HDFC बैंक का अपना उदाहरण भी समझने लायक है: ₹1,50,000 की कार्ड लिमिट पर इंस्टा लोन ₹1,20,000 तक हो सकता है, और अगर कार्ड पर पहले से ₹50,000 का ख़र्च बकाया है, तो लोन ₹1,00,000 से ऊपर नहीं जाएगा।
एक ही सैलरी पर अलग-अलग लोन: रकम इतनी अलग क्यों?
मान लीजिए आपकी शुद्ध मासिक आय ₹60,000 है और कोई पुरानी किस्त नहीं चल रही। नीचे का हिसाब हमारा उदाहरण है, किसी बैंक का प्रस्ताव नहीं:
| लोन | कौन-सा नियम लगेगा | हिसाब | लगभग पात्रता |
|---|---|---|---|
| पर्सनल लोन (SBI का नियम, 11.54%, 5 साल) | 30 गुना NMI या 65% EMI — जो कम हो | ₹18,00,000 बनाम ₹39,000 की EMI से ₹17,71,705 | ₹17.7 लाख |
| होम लोन (उदाहरण: 50% EMI सीमा, 8.50%, 20 साल) | EMI ₹30,000 | ₹30,000 की EMI से ₹34,56,925 | ₹34.6 लाख |
| वही होम लोन, 25 साल | EMI ₹30,000 | अवधि 5 साल लंबी होने पर ₹37,25,657 | ₹37.3 लाख |
होम लोन में आय का छोटा हिस्सा EMI में मानने पर भी रकम लगभग दोगुनी बनती है, क्योंकि दर कम है और अवधि कई गुना लंबी। 11.54% वह औसत दर है जो SBI ने 2026-27 की पहली तिमाही के पर्सनल लोन के लिए छापी है; 8.50% HDFC बैंक की प्रकाशित होम लोन रेंज (7.75%–13.20%) के भीतर चुना गया उदाहरण है। दोनों दरें 8 अक्टूबर 2026 को जाँची गईं। 7 अक्टूबर की मौद्रिक नीति में रेपो 5.25% से 5.50% हो गया है, जबकि HDFC की यह रेंज अभी 5.25% के आधार पर छपी है — इसलिए रेपो से जुड़ी होम लोन दरें आने वाले दिनों में ऊपर जा सकती हैं।
पर होम लोन पर दूसरी रोक भी है — LTV। ₹34.6 लाख का लोन ₹30–75 लाख वाली श्रेणी में आता है, जहाँ RBI की सीमा 80% है; यानी मकान की कीमत कम से कम लगभग ₹43.2 लाख होनी चाहिए। यह कीमत स्टांप ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन जोड़े बिना गिनी जाती है — RBI ने इन्हें जोड़ने की छूट सिर्फ़ ₹10 लाख तक के मकानों को दी है।
गिरवी वाले दो छोटे उदाहरण
- सोना: ₹2,00,000 के गहनों पर कुल लोन ₹2.5 लाख से कम रहेगा, इसलिए 85% तक — अधिकतम ₹1,70,000। ₹8,00,000 के गहनों पर लोन ₹5 लाख से ऊपर जाएगा और 75% की सीमा लगेगी — अधिकतम ₹6,00,000। कीमत सिर्फ़ सोने की गिनी जाती है, नग या पत्थर की नहीं। बैंकवार दरें हमारे गोल्ड लोन पेज पर हैं।
- LIC पॉलिसी: सरेंडर वैल्यू ₹1,00,000 हो तो आम नियम पर अधिकतम लोन ₹90,000 और पेड-अप पॉलिसी पर ₹85,000। पर New Endowment Plan जैसे नए प्लान में चालू पॉलिसी पर यही रकम ₹50,000 (दो वर्ष के प्रीमियम पूरे होने से पहले) या ₹75,000 (उसके बाद) तक सीमित रहेगी।
पर्सनल लोन: बैंक, NBFC या ऐप — कहाँ से कितना?
पर्सनल लोन में गिरवी नहीं होती, इसलिए लेंडर बदलने से सीमा भी बदल जाती है। SBI और तीन बड़े निजी बैंक (HDFC, ICICI, Axis) अपनी वेबसाइट पर ₹50 लाख तक लिखते हैं, जबकि PNB की आम लोगों वाली योजना ₹20 लाख पर रुकती है। NBFC में बजाज फाइनेंस ₹40,000 से ₹55 लाख तक की रेंज बताता है। लोन ऐप्स में ऊपरी सीमा बहुत अलग-अलग है — हमारे सत्यापित डेटाबेस में Pocketly ₹50,000 तक, KreditBee और MoneyView ₹10 लाख तक और Navi ₹20 लाख तक लिखते हैं।
बड़े बैंकों की सीमाएँ आमने-सामने रखकर देखनी हों तो सात बड़े बैंकों की तुलना पढ़िए। एक ही बैंक के सारे लोन चाहिए तो स्टेट बैंक के हर लोन की ऊपरी सीमा और HDFC की होम, कार, गोल्ड व LAP सीमाएँ अलग-अलग लिखी गई हैं; सिर्फ़ SBI के पर्सनल लोन की बारीक शर्तें SBI पर्सनल लोन वाले लेख में हैं। NBFC की तरफ़ बजाज फाइनेंस के अलग-अलग लोन की सीमाएँ उसकी अपनी वेबसाइट से जाँची गई हैं।
ऐप और कार्ड से जुड़े तीन सवालों पर अलग लेख हैं: Paytm पर दिखने वाले लोन ऑफ़र और उनके लेंडर, Dhani की आज की असली स्थिति, और बजाज फिनसर्व के Insta EMI कार्ड की लिमिट।
बिज़नेस लोन: पहले योजना की सीमा देखिए
छोटे कारोबार के लिए सबसे जानी-पहचानी सरकारी योजना प्रधानमंत्री मुद्रा योजना है। इसमें चार श्रेणियाँ हैं:
- शिशु: ₹50,000 तक
- किशोर: ₹50,000 से ऊपर ₹5 लाख तक
- तरुण: ₹5 लाख से ₹10 लाख तक
- तरुण प्लस: ₹10 लाख से ₹20 लाख तक — सिर्फ़ उन उद्यमियों के लिए जिन्होंने पिछला तरुण लोन सफलतापूर्वक चुका दिया है
मुद्रा ख़ुद सीधे लोन नहीं देता; ये लोन बैंक, RRB, स्मॉल फाइनेंस बैंक, NBFC और MFI देते हैं। बड़े, बिना गिरवी वाले MSE लोन के लिए CGTMSE की गारंटी काम आती है, जिसकी अधिकतम सीमा अब ₹10 करोड़ है। टर्नओवर और GST रिटर्न से तय होने वाली सीमाओं का हिसाब कारोबारी लोन वाली अलग गाइड में है।
आधार, पैन या मार्कशीट "पर" कितना लोन? पहले भ्रम दूर कीजिए
इंटरनेट पर सबसे ज़्यादा खोजे जाने वाले तीन सवालों की बुनियाद ही ग़लत है:
- आधार कार्ड पहचान और पते का सबूत है, जिससे KYC पूरी होती है। रकम आधार से नहीं, आय और क्रेडिट रिकॉर्ड से बनती है — आधार e-KYC वाले लोन का पूरा सच अलग लेख में है।
- पैन कार्ड से आपकी क्रेडिट रिपोर्ट खुलती है, इसलिए यह अहम है; पर रकम रिपोर्ट और आय से तय होती है, पैन नंबर से नहीं — देखें पैन, क्रेडिट रिपोर्ट और पैन के दुरुपयोग वाला लेख।
- मार्कशीट पर कोई बैंक या NBFC लोन नहीं देता। छात्रों के असली विकल्प — एजुकेशन लोन और उसकी शर्तें अलग से समझाए गए हैं।
अपनी सीमा ख़ुद कैसे निकालें: पाँच क़दम
- शुद्ध मासिक आय लिखिए — सैलरी स्लिप की "नेट पे", सकल वेतन नहीं।
- सारी चालू किस्तें जोड़िए। ICICI बैंक के पात्रता कैलकुलेटर में भी "Total existing obligation/EMI" अलग से भरना होता है, क्योंकि यही किस्तें नई EMI की जगह घेरती हैं।
- लेंडर की EMI सीमा लगाइए (जैसे 50% या 65%) और उसमें से चालू किस्तें घटा दीजिए। यही नई EMI की गुंजाइश है।
- उस EMI से रकम निकालिए — EMI कैलकुलेटर में दर और अवधि डालकर, या सीधे हमारी लोन पात्रता जाँच से।
- गिरवी वाले लोन में LTV से मिलान कीजिए — आय से निकली रकम और LTV वाली रकम में जो छोटी हो, वही मानिए।
किन दावों पर भरोसा न करें
- "पक्की मंज़ूरी" वाले वादे: ऊपर के चारों नियम हर आवेदन पर लगते हैं, इसलिए जाँच से पहले कोई रकम तय नहीं हो सकती। कोई भी असली लेंडर आय और रिकॉर्ड देखे बिना रकम तय नहीं करता।
- लोन से पहले फीस: RBI के Digital Lending Directions 2025 कहते हैं कि मंज़ूर रकम सीधे आपके नाम वाले बैंक खाते में ही जमा होगी, किसी तीसरे के खाते में कभी नहीं; साथ ही सारी शर्तें Key Fact Statement (KFS) में लिखित मिलेंगी। "पहले प्रोसेसिंग चार्ज UPI कीजिए" वाला कॉल ठगी का सीधा संकेत है।
- मुद्रा लोन के "एजेंट": मुद्रा की वेबसाइट पर साफ़ लिखा है कि लोन दिलाने के लिए उसने कोई एजेंट या बिचौलिया नहीं रखा।
- शिकायत कहाँ करें: गृह मंत्रालय के I4C के अनुसार साइबर ठगी की शिकायत cybercrime.gov.in पर या 1930 पर की जा सकती है।
निष्कर्ष
कितना लोन मिल सकता है, यह कोई एक संख्या तय नहीं करती। बिना गिरवी वाले लोन में सैलरी का गुना और EMI की सीमा, गिरवी वाले लोन में LTV, और हर लोन में क्रेडिट रिकॉर्ड व उम्र — इनमें से जो सबसे कम रकम दे, वही आपकी असली सीमा है।
शुरुआत अपने लोन के प्रकार से कीजिए: ऊपर की तालिका से सही गाइड खोलिए, अपनी आय और चालू किस्तों से EMI की गुंजाइश निकालिए, और फिर पर्सनल लोन या दूसरे लोन के ऑफ़र मिलाइए। मंज़ूरी पत्र पर दस्तख़त से पहले दर, फीस और KFS ज़रूर पढ़िए।