सैलरी का कितना प्रतिशत लोन मिल सकता है — इसका जवाब एक प्रतिशत में नहीं, दो क़दमों में है। पहला: बैंक तय करता है कि आपकी सारी EMI शुद्ध मासिक आय (NMI) का कितना हिस्सा हो सकती हैं; जो बैंक यह सीमा छापते हैं, उनमें यह आम तौर पर 50% से 65% है (SBI पर्सनल लोन 65%, SBI प्रॉपर्टी लोन आय के हिसाब से 50–60%, SBI होम लोन में 20–70%, जहाँ स्लैब आपकी सालाना आय से तय होता है)। दूसरा: उस EMI को दर और अवधि से लोन की रकम में बदला जाता है। ₹50,000 की शुद्ध आय पर 50% का मतलब ₹25,000 की कुल EMI है, जो 11.54% पर 5 साल के पर्सनल लोन में लगभग ₹11.4 लाख और 8.50% (उदाहरण) पर 20 साल के होम लोन में लगभग ₹28.8 लाख चुकाती है।
यानी "सैलरी के प्रतिशत" वाला सवाल असल में EMI के प्रतिशत का सवाल है। नीचे बैंकों की प्रकाशित सीमाएँ, उन्हें रुपयों में बदलने का फ़ॉर्मूला और हर सैलरी स्तर की तालिका है। सारे नियम 8 अक्टूबर 2026 को बैंकों की अपनी वेबसाइट से जाँचे गए; हर रकम हमारी अपनी गणना है।
बैंक EMI के लिए सैलरी का कितना प्रतिशत मानते हैं?
ज़्यादातर निजी बैंक — HDFC बैंक, ICICI बैंक, Axis बैंक — यह प्रतिशत सार्वजनिक नहीं करते; वे इसे अंदरूनी आकलन से तय करते हैं। जिन बैंकों ने इसे लिखा है, उनकी सीमाएँ ये हैं:
| बैंक और लोन | प्रकाशित नियम | किस आय पर |
|---|---|---|
| SBI पर्सनल लोन | EMI/NMI अधिकतम 65% (और रकम 30 गुना NMI से ज़्यादा नहीं) | शुद्ध मासिक आय |
| SBI पेंशन लोन | EMI/NMP अधिकतम 50%; पारिवारिक पेंशन पर 33% | शुद्ध मासिक पेंशन |
| SBI प्रॉपर्टी लोन (P-LAP) | 50% / 55% / 60% — क्रमशः ₹3–5 लाख, ₹5–10 लाख और ₹10 लाख+ सालाना आय पर | शुद्ध आय |
| SBI होम लोन | सालाना शुद्ध आय के अलग-अलग स्लैब पर 20%–70% की रेंज | शुद्ध आय (टैक्स व वेतन-कटौतियों के बाद) |
| Indian Bank पर्सनल लोन | नई EMI समेत सारी कटौतियों के बाद ≥ 40% ग्रॉस सैलरी घर आए | सकल वेतन |
| Indian Bank होम लोन | सालाना आय ₹15 लाख तक: टेक-होम सकल आय का कम से कम 40%; उससे ऊपर: कम से कम ₹50,000 महीना | सकल आय |
दो बातें इस तालिका से साफ़ होती हैं। पहली, सीमा लोन के प्रकार से बदलती है — पेंशन पर कम, पर्सनल लोन पर ज़्यादा। दूसरी, कई जगह यह आय के साथ बढ़ती है: SBI के प्रॉपर्टी लोन में ₹4 लाख सालाना कमाने वाले की EMI आय के आधे तक जा सकती है, जबकि ₹12 लाख कमाने वाले की 60% तक।
FOIR, EMI/NMI और "टेक-होम": नाम तीन, गणित अलग
बैंकिंग में इस एक विचार के तीन नाम चलते हैं, और इनका गणित एक जैसा नहीं:
- FOIR / EMI-NMI: सारी किस्तें ÷ शुद्ध मासिक आय। SBI इसी तरीके से गिनता है।
- नेट टेक-होम (NTHP): सारी कटौतियों और नई EMI के बाद हाथ में बची रकम, जिसे सकल वेतन के प्रतिशत के रूप में देखा जाता है। Indian Bank यह तरीका अपनाता है।
- गुणक: सीधे सैलरी का गुना (जैसे SBI पर्सनल लोन में 30 गुना NMI)। यह प्रतिशत वाली शर्त के साथ अलग से लगता है।
उदाहरण: एक सैलरी, दो तरीके
मान लीजिए सकल मासिक वेतन ₹60,000 है और PF व टैक्स कटकर हाथ में ₹52,000 आते हैं। कोई पुरानी किस्त नहीं:
| तरीका | हिसाब | अधिकतम कुल EMI | शुद्ध आय का प्रतिशत |
|---|---|---|---|
| SBI जैसा: EMI/NMI 65% | ₹52,000 × 65% | ₹33,800 | 65% |
| Indian Bank जैसा: टेक-होम ≥ सकल का 40% | ₹52,000 − (₹60,000 × 40%) | ₹28,000 | लगभग 53.8% |
एक ही व्यक्ति के लिए दोनों नियमों में ₹5,800 महीने का अंतर है। इसलिए किसी बैंक की शर्त पढ़ते समय सबसे पहले यह देखिए कि प्रतिशत सकल पर है या शुद्ध पर।
प्रतिशत को रुपये में कैसे बदलें: फ़ॉर्मूला और "₹1,000 की EMI" तालिका
EMI की गुंजाइश पता हो तो लोन की रकम इस फ़ॉर्मूले से निकलती है:
लोन = EMI × [(1 + r)ⁿ − 1] ÷ [r × (1 + r)ⁿ], जहाँ r = सालाना दर ÷ 12 ÷ 100 और n = महीनों की संख्या।
हिसाब आसान करने के लिए नीचे बताया गया है कि हर ₹1,000 की मासिक EMI कितना लोन चुका सकती है। पर्सनल लोन के लिए 11.54% लिया गया है (SBI का Q1 FY27 Mean ROI); होम लोन के लिए 8.50%, जो HDFC बैंक की छापी गई 7.75%–13.20% की रेंज में आता है (उदाहरण); 24% ऊँची दर वाले ऐप लोन का उदाहरण है।
| लोन और शर्त | हर ₹1,000 EMI पर लोन |
|---|---|
| पर्सनल लोन — 11.54%, 3 साल | ₹30,308 |
| पर्सनल लोन — 11.54%, 5 साल | ₹45,428 |
| पर्सनल लोन — 11.54%, 7 साल | ₹57,446 |
| ऊँची दर वाला लोन — 24%, 2 साल | ₹18,914 |
| होम लोन — 8.50%, 15 साल | ₹1,01,550 |
| होम लोन — 8.50%, 20 साल | ₹1,15,231 |
| होम लोन — 8.50%, 30 साल | ₹1,30,054 |
उपयोग का तरीका: अपनी EMI की गुंजाइश को हज़ार में लिखिए और कॉलम की संख्या से गुणा कीजिए। ₹18,000 की गुंजाइश हो तो 5 साल के पर्सनल लोन में 18 × ₹45,428 = लगभग ₹8.18 लाख। सटीक आँकड़े के लिए EMI कैलकुलेटर सबसे आसान रास्ता है।
सैलरी × प्रतिशत तालिका: ₹20,000 से ₹1.5 लाख तक
तीन प्रतिशतों पर EMI की सीमा, और फिर दो आम स्थितियों में बनने वाली रकम — पर्सनल लोन 65% पर (SBI का नियम, 11.54%, 5 साल) और होम लोन 50% पर (उदाहरण, 8.50%, 20 साल)। मान लिया गया है कि कोई चालू किस्त नहीं है।
| शुद्ध मासिक आय | 40% पर EMI | 50% पर EMI | 65% पर EMI | पर्सनल लोन (65%, 5 साल) | होम लोन (50%, 20 साल) |
|---|---|---|---|---|---|
| ₹20,000 | ₹8,000 | ₹10,000 | ₹13,000 | ₹5,90,568 | ₹11,52,308 |
| ₹30,000 | ₹12,000 | ₹15,000 | ₹19,500 | ₹8,85,853 | ₹17,28,463 |
| ₹50,000 | ₹20,000 | ₹25,000 | ₹32,500 | ₹14,76,421 | ₹28,80,771 |
| ₹75,000 | ₹30,000 | ₹37,500 | ₹48,750 | ₹22,14,631 | ₹43,21,156 |
| ₹1,00,000 | ₹40,000 | ₹50,000 | ₹65,000 | ₹29,52,842 | ₹57,61,542 |
| ₹1,50,000 | ₹60,000 | ₹75,000 | ₹97,500 | ₹44,29,263 | ₹86,42,313 |
पर्सनल लोन वाले कॉलम की हर रकम SBI की 30 गुना NMI वाली छत के भीतर है, इसलिए यहाँ EMI की शर्त ही निर्णायक है। सैलरी-स्तर के हिसाब से पर्सनल लोन के लेंडर, न्यूनतम आय और उदाहरण अलग लेख में हैं; ₹50,000 की आय के लिए हमारा ₹50,000 सैलरी पर पर्सनल लोन पेज भी देख सकते हैं।
पहले से चल रही EMI प्रतिशत को कैसे खा जाती है
प्रतिशत की सीमा सारी देनदारियों पर लगती है। ICICI बैंक के पात्रता कैलकुलेटर में "Total existing obligation/EMI" का अलग खाना इसी वजह से है।
उदाहरण: शुद्ध मासिक आय ₹80,000 है, और कार व मोबाइल की किस्तों में हर महीने ₹18,000 जा रहे हैं। बैंक 50% की सीमा (उदाहरण) लगाता है:
| स्थिति | कुल EMI सीमा | पहले से चालू EMI | नई EMI की गुंजाइश | होम लोन (8.50%, 20 साल) |
|---|---|---|---|---|
| कोई चालू किस्त नहीं | ₹40,000 | ₹0 | ₹40,000 | ₹46,09,234 |
| ₹18,000 की चालू किस्तें | ₹40,000 | ₹18,000 | ₹22,000 | ₹25,35,078 |
₹18,000 की किस्तें होम लोन की पात्रता लगभग ₹20.7 लाख घटा देती हैं — यानी हर ₹1,000 की चालू EMI यहाँ लगभग ₹1.15 लाख का होम लोन रोकती है। अगर कार लोन के कुछ ही महीने बचे हैं, तो उसे पहले चुका देना होम लोन की रकम पर सबसे बड़ा असर डाल सकता है।
होम लोन बनाम पर्सनल लोन: प्रतिशत एक, रकम में बड़ा अंतर
मान लीजिए आपकी EMI की गुंजाइश ₹25,000 है। यही रकम अलग-अलग लोन में कितना उधार चुका सकती है:
| लोन | दर और अवधि | ₹25,000 EMI से लोन |
|---|---|---|
| पर्सनल लोन | 11.54%, 5 साल | ₹11,35,708 |
| होम लोन | 8.50%, 20 साल (उदाहरण) | ₹28,80,771 |
| होम लोन | 8.50%, 25 साल (उदाहरण) | ₹31,04,714 |
| होम लोन | 8.50%, 30 साल (उदाहरण) | ₹32,51,341 |
होम लोन ढाई गुना से ज़्यादा रकम इसलिए देता है क्योंकि दर कम है और अवधि लंबी। पर उसकी दो और सीमाएँ हैं जो पर्सनल लोन में नहीं:
1. उम्र: SBI में होम लोन अधिकतम 30 साल का हो सकता है और उसे चुकाने की आख़िरी उम्र 70 वर्ष है। ₹35,000 की EMI और 8.50% (उदाहरण) पर:
| आवेदक की उम्र | अधिकतम अवधि (70 वर्ष तक) | ₹35,000 EMI से लोन |
|---|---|---|
| 35 वर्ष | 30 साल | ₹45,51,878 |
| 45 वर्ष | 25 साल | ₹43,46,600 |
| 55 वर्ष | 15 साल | ₹35,54,239 |
2. मकान की कीमत (LTV): RBI ने इसकी तीन सीढ़ियाँ बनाई हैं — ₹30 लाख या कम के लोन पर कीमत का 90%, ₹30 लाख से ऊपर और ₹75 लाख तक 80%, और इससे बड़े लोन पर 75%। आय कितनी भी हो, लोन इस सीमा से ऊपर नहीं जाता। LTV, सह-आवेदक और स्टांप ड्यूटी समेत होम लोन की पूरी पात्रता अलग लेख में है, और अपना मकान गिरवी रखने वालों के लिए प्रॉपर्टी पर लोन और टॉप-अप की गाइड भी।
रेपो रेट बढ़ा तो आपका प्रतिशत क्या होगा?
7 अक्टूबर 2026 की बैठक में RBI की MPC ने नीतिगत रेपो दर में 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी की, और यह अब 5.50% है। रेपो से जुड़े होम लोन पर इसका असर सीधा है — Bank of Baroda ने अपनी रेपो-लिंक्ड दर (BRLLR) 8 अक्टूबर 2026 से 8.15% कर दी है, और HDFC बैंक की वेबसाइट पर अभी दिख रही रेंज 5.25% के पुराने रेपो पर आधारित है।
उदाहरण: ₹30 लाख का होम लोन, 20 साल, 8.50% पर EMI ₹26,035 है। दर 8.75% होते ही EMI ₹26,511 हो जाती है — ₹477 महीने ज़्यादा। अगर बैंक EMI वही रखकर अवधि बढ़ाए, तो लोन लगभग 252 महीने, यानी क़रीब एक साल ज़्यादा चलेगा।
जिसने EMI को आय की अधिकतम सीमा तक खींच रखा है, उसके लिए यही ₹477 महीने का बोझ बजट बिगाड़ देता है। इसलिए बैंक की सीमा से कुछ प्रतिशत नीचे रहना समझदारी है।
सीमा के भीतर रहते हुए ज़्यादा रकम कैसे बने
- सह-आवेदक जोड़िए। SBI के FAQ के अनुसार जीवनसाथी की सैलरी जोड़कर पात्रता गिनी जा सकती है। ₹40,000 की अकेली आय पर 50% (उदाहरण) से 8.50% और 20 साल में ₹23,04,617 बनते हैं; ₹25,000 कमाने वाले जीवनसाथी के साथ कुल ₹65,000 पर यही हिसाब ₹37,45,002 देता है।
- छोटी किस्तें पहले बंद कीजिए। ऊपर के उदाहरण में ₹1,000 की चालू EMI लगभग ₹1.15 लाख का होम लोन रोक रही थी।
- उम्र के भीतर अवधि बढ़ाइए। 20 से 30 साल करने पर उसी EMI से रकम बढ़ती है, पर ब्याज भी — अगला सेक्शन देखिए।
- स्टेप-अप विकल्प देखिए। SBI Flexipay होम लोन को "higher eligibility with step up moratorium" वाला प्रोडक्ट बताता है; उसकी शर्तें आवेदन से पहले बैंक से लिखित में लीजिए।
- सही लोन चुनिए। मकान के लिए होम लोन ही लीजिए, पर्सनल लोन नहीं — ऊपर की तालिका में वही ₹25,000 की EMI होम लोन में ढाई गुना से ज़्यादा रकम चुका रही थी।
ये ग़लतियाँ महँगी पड़ती हैं
- सकल को शुद्ध मान लेना। SBI शुद्ध आय पर गिनता है। ₹60,000 के सकल वेतन से हिसाब लगाया और हाथ में ₹52,000 आते हैं, तो पात्रता 13% से ज़्यादा कम निकलेगी।
- सबसे लंबी अवधि को मुफ़्त समझना। ₹30 लाख, 8.50% पर 20 साल में कुल ब्याज ₹32,48,327 बनता है; 30 साल में ₹53,04,266 — EMI सिर्फ़ ₹2,968 घटती है, पर ब्याज ₹20 लाख से ज़्यादा बढ़ जाता है।
- चालू किस्तें छुपाना। हर लोन क्रेडिट रिपोर्ट में दिखता है, और SBI 6 महीने का सैलरी खाता स्टेटमेंट माँगता है — कटती हुई किस्तें वहीं दिख जाती हैं।
- सैलरी स्लिप "बढ़वाना"। आय बढ़ाकर दिखाने वाले दस्तावेज़ बनवाना धोखाधड़ी है; पकड़े जाने पर लोन रद्द होता है और क़ानूनी कार्रवाई हो सकती है। ऐसे "एजेंट" से भी दूर रहिए जो फीस लेकर "FOIR सेट करवाने" का दावा करे।
निष्कर्ष
सैलरी का कितना प्रतिशत लोन मिल सकता है, इसका व्यावहारिक जवाब यह है: अपनी शुद्ध मासिक आय पर लेंडर की EMI सीमा लगाइए — प्रकाशित सीमाएँ आम तौर पर 50% से 65% हैं — उसमें से चालू किस्तें घटाइए, और बची EMI को दर और अवधि से रुपयों में बदलिए। वही प्रतिशत होम लोन में पर्सनल लोन से ढाई-तीन गुना रकम बनाता है, पर होम लोन पर उम्र और LTV की दो और छतें हैं।
सभी प्रकार के लोन की सीमाएँ साथ-साथ देखने के लिए सभी लोन की सीमाओं वाला मुख्य पेज खोलिए, और अपनी असली पात्रता के लिए हमारी लोन पात्रता जाँच आज़माइए। बैंक की सीमा तक पहुँचने के बजाय उससे थोड़ा नीचे रुकना ही ब्याज दर बढ़ने के दौर में सबसे सुरक्षित रणनीति है।